जहां पर हम काम का तनाव छोड़कर एक साथ मिलकर हर उस पल को सही मायने में जीते हैं। जहां पर हम काम का तनाव छोड़कर एक साथ मिलकर हर उस पल को सही मायने में जीत...
अभी शाम ढली भी नहीं, कि जीवन में अंधेरा हो गया। अभी शाम ढली भी नहीं, कि जीवन में अंधेरा हो गया।
वह भी क्या दिन थे, पापा की गोदी और माँ का दुलार! वह भी क्या दिन थे, पापा की गोदी और माँ का दुलार!
ग़म सारे भूलाकर मुस्कुराती हूँ, फूलों की तरह। ग़म सारे भूलाकर मुस्कुराती हूँ, फूलों की तरह।
माना कि ये जिंदगी, आसां नहीं जीने के लिए। माना कि ये जिंदगी, आसां नहीं जीने के लिए।
घर - परिवार का गुमान हो शहीदी को शत-शत प्रणाम हो। घर - परिवार का गुमान हो शहीदी को शत-शत प्रणाम हो।